Dissertation/Thesis Abstract

Chougas: Detha's Reali-fictitious Rabbit Hole to Rajasthani Folklore
by Watson, Mrinalini, M.F.A., Mills College, 2018, 74; 10826298
Abstract (Summary)

राजस्थानी किस्से-कहानियोंका प्रस्तुत समुच्चय/सेट यह देखने व जानने की अंतर्दृष्टि देता है कि लेखक और लोक कथाकार विजयदान देथा अपनी एक परिचयात्मक कविता "छोगा" का, लोक कथाओं का रूप गढ़ने और सामाजिक अन्याय को इंगित करने हेतु किस तरह उपयोग करते हैं? विश्लेषण में दो कहानियों "दूजो कबीर" और "दिवाले की बपौती" के अनुवादों में से लिये गए उदाहरण समाहित हैं। पहली कहानी "दूजो कबीर" एक परिकथा है, एक राजकुमारी और एक निर्धन व्यक्ति जिसके मुख्य पात्र हैं। दूसरी कहानी अपेक्षाकृत ज्यादा वास्तविक है, जो इस बात पर प्रकाश डालती है कि गांव के पुजारी की दरिद्रता किस तरह गांव के विभिन्न लोगों पर अपना असर छोड़ती है। दोनों ही कहानियां राजस्थानी समाज में व्याप्त जातिवाद और वर्गभेद के साथ-साथ सत्ता में शामिल लोगों द्वारा गरीबों पर किये जानेवाले अत्याचारों पर प्रहार करती हैं।

Indexing (document details)
Advisor: Grunebaum, Jason, Obejas, Achy
Commitee:
School: Mills College
Department: English-Translation
School Location: United States -- California
Source: MAI 57/06M(E), Masters Abstracts International
Source Type: DISSERTATION
Subjects: Translation studies, Folklore
Keywords: Chouga, Detha, Rajasthani folktale, Social justice
Publication Number: 10826298
ISBN: 9780438088818
Copyright © 2019 ProQuest LLC. All rights reserved. Terms and Conditions Privacy Policy Cookie Policy
ProQuest